क्या है ? कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम

क्या है ? कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, किसी महिला को घूरना और पीछा करना यौन अपराध कहलाएगा? आइए जानते है इस लेख में एडवोकेट अंकिता रा जयसवाल जी जिला ऐव सत्र न्यायालय अमरावती के साथ

दोस्तों आज के लेख में हम जानेंगे कार्यस्थल पर होने वाले महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न और उससे जुड़े कानूनों के बारे में यह लेख आप सभी को जागरूक कराने की हित में लिखा जा रहा है जिससे आप सभी कार्यस्थल पर होने वाले महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न एवं अपराधो के बारे में साथ ही आप सभी को मेरे सोशल और लीगलअपडेट पाने के लिए मेरे फेसबुक पेज लीगल अवेयरनेस टॉप बाय एडवोकेट अंकिता रा जयसवाल को भेट दे एवं लाइक और फॉलो करें साथ ही मुझसे जुड़ने के लिए nyaykagyan.blogspot.com पर जुड़े रहे।

आज देश भर में हर तरफ #MeToo पर चर्चा हो रही है। इनमें से कई महिलाओं ने कार्यस्थल पर ही शोषण की बात कही है। वर्क प्लेस पर महिलाओं को इस तरह के अपराधों से सुरक्षित रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर विशाखा गाइडलाइन्स बनाई गई थीं।

क्या है विशाखा दिशानिर्देश?
1) विशाखा गाइडलाइन की मुख्य बातें: महिला को गलत तरीके से छूना या छूने की कोशिश करना, गलत तरीके से देखना या घूरना, यौन संबंध बनाने के लिए कहना, अश्लील टिप्पणी करना, यौन इशारे करना, अश्लील चुटकुले सुनाना या भेजना, पोर्न फिल्में दिखाना ये सभी यौन उत्पीड़न के दायरे में आता है।
2)10 या उससे ज्यादा कर्मचारियों वाले हर संस्थान को इंटरनल कम्प्लेंट्स कमेटी (आईसीसी) बनाना अनिवार्य है।
इस कमेटी की अध्यक्ष महिला ही होगी, कमेटी की आधी से ज्यादा सदस्य भी महिलाएं ही होंगी। इसके अलावा यौन शोषण के मुद्दे पर काम कर रहे एनजीओ की एक महिला प्रतिनिधि को भी कमेटी में शामिल करना जरूरी है।
3)संस्थान में काम करने वाली कोई भी महिला अपने साथ हुए यौन उत्पीड़न की शिकायत आईसीसी से कर सकती है। जिसकी जांच कमेटी करेगी और 90 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश करेगी।
4)इसके अलावा संस्थान न तो शिकायतकर्ता महिला पर दबाव बनाएगा और न ही कमेटी के किसी सदस्य को दबाव में लेने की कोशिश करेगा।
5)कमेटी अपनी जांच में अगर किसी को आरोपी पाती है तो उसके खिलाफ आईपीसी की धाराओं के तहत कार्रवाई की जा जाएगी।
6)सभी संस्थानों की आईसीसी को हर साल एक बार अपने पास आई शिकायतों का लेखा-जोखा और कार्रवाई की डिटेल्स को एक रिपोर्ट के रूप में सरकार के पास भेजना होता है।
7)अगर महिला कमेटी के फैसले से संतुष्ट नहीं है तो वह पुलिस में कम्प्लेन भी कर सकती है।

⭐पार्श्वभूमि : कार्यस्थल पर होने वाले यौन-उत्पीड़न के ख़िलाफ़ साल 1997 में सुप्रीम कोर्ट ने कुछ निर्देश जारी किए थे। सुप्रीम कोर्ट के इन निर्देशों को ‘विशाखा गाइडलाइन्स’ के रूप में जाना जाता है। इसे विशाखा और अन्य बनाम राजस्थान सरकार और भारत सरकार मामले के तौर पर भी जाना जाता है। इस फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यौन-उत्पीड़न, संविधान में निहित मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हैं। इसके साथ ही इसके कुछ मामले स्वतंत्रता के अधिकार के उल्लंघन के तहत भी आते हैं।
1997 से पहले महिलाएं कार्यस्थल पर होने वाले यौन-उत्पीड़न की शिकायत आईपीसी की धारा 354 (महिलाओं के साथ होने वाली छेड़छाड़ या उत्पीड़न के मामले) और धारा 509 (किसी औरत के सम्मान को चोट पहुंचाने वाली बात या हरकत) के तहत दर्ज करवाती थीं।
सुप्रीम कोर्ट ने विशाखा गाइडलाइन्स के तहत कार्यस्थल के मालिक के लिए ये ज़िम्मेदारी सुनिश्चित की थी कि किसी भी महिला को कार्यस्थल पर बंधक जैसा महसूस न हो, उसे कोई धमकाए नहीं। साल 1997 से लेकर 2013 तक दफ़्तरों में विशाखा गाइडलाइन्स के आधार पर ही इन मामलों को देखा जाता रहा, लेकिन 2013 में ‘सेक्सुअल हैरेसमेंट ऑफ वुमन एट वर्कप्लेस एक्ट’ आया।

⭐भारतीय दंड संहिता का पुनरीक्षण:
केंद्रीय गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs- MHA) वर्ष 1860 में अंग्रेज़ों द्वारा लागू की गई IPC का पुनरीक्षण करने के लिये एक योजना पर काम कर रहा है।
कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के खिलाफ मौजूदा कानूनों में बदलाव IPC के प्रावधानों के पूर्ण अवलोकन के बाद ही किया जाएगा। ‘ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट’ (Bureau of Police Research and Development- BPR&D) द्वारा IPC और आपराधिक प्रक्रिया संहिता (Code of Criminal Procedure- Cr.PC) के विभिन्न प्रावधानों में संशोधन के लिये कई सेवानिवृत्त न्यायाधीशों, कानूनवेत्ताओं और राज्य सरकारों से परामर्श किया जा रहा है।

⭐महिला और बाल विकास मंत्रालय ने वर्ष 2013 में कार्यस्‍थल पर ‘महिलाओं का यौन उत्‍पीड़न (निवारण, निषेध एवं निदान) अधिनियम, 2013’ [Sexual Harassment of Women and Workplace (Prevention, Prohibition and Redressal) Act, 2013] लागू किया था जो कि सरकारी कार्यालयों, निजी क्षेत्र, गैर सरकारी संगठनों और असंगठित क्षेत्र पर लागू हुआ था।

⭐2013 में आए कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम ने कार्यस्थल की परिभाषा को व्यापक किया और घरेलू कामगारों समेत अनौपचारिक क्षेत्र को इसके दायरे में लाया. पॉश नाम से लोकप्रिय यह अधिनियम स्वास्थ्य, खेल, शिक्षा के साथ–साथ सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों या सरकारी संस्थानों में और परिवहन समेत अपने नियोजन के दौरान कर्मचारी के भ्रमण के किसी भी स्थान में सभी कामगारों को सुरक्षा प्रदान करता है.
इस कानून में यौन उत्पीड़न को शारीरिक संपर्क और कोशिशों, या यौन अनुग्रह हेतु मांग या अनुरोध, या कामुक टिप्पणी, या अश्लील साहित्य या चित्र का प्रदर्शन, या यौन प्रकृति के किसी अन्य अवांछित शारीरिक, मौखिक, या गैर-मौखिक आचार-व्यवहार के रूप में परिभाषित किया गया है. इनमें से कोई भी कार्य चाहे प्रत्यक्ष हो या सांकेतिक, कानून के तहत यौन उत्पीड़न है. यह कानून पुलिस में आपराधिक शिकायत दर्ज करने के बजाय एक और विकल्प प्रदान करता है. शिकायत सुनने, जांच करने और अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने की सिफारिश के लिए यह कानून समिति का गठन करने हेतु निजी कंपनी के मामलों में नियोक्ताओं को, या अनौपचारिक क्षेत्र के मामले में स्थानीय सरकारी अधिकारियों को बाध्य करता है. कार्रवाई में लिखित माफी से लेकर नौकरी से निष्कासन तक हो सकती है. 10 से अधिक कर्मचारियों वाले कार्यस्थलों पर एक ऐसी समिति गठित करना आवशयक है जो विशेष रूप से यौन उत्पीड़न के मामलों को संभालती है। इसे ‘आंतरिक शिकायत समिति’ के नाम से जाना जाता है।

यौन उत्पीड़न क्या है?
इस अधिनियम के तहत निम्नलिखित व्यवहार या कृत्य ‘यौन उत्पीड़न’ की श्रेणी में आता है

व्यवहार या कृत्य

इच्छा के खिलाफ छूना या छूने की कोशिश करना जैसे यदि एक तैराकी कोच छात्रा को तैराकी सिखाने के लिए स्पर्श करता है तो वह यौन उत्पीड़न नहीं कहलाएगा lपर यदि वह पूल के बाहर, क्लास ख़त्म होने के बाद छात्रा को छूता है और वह असहज महसूस करती है, तो यह यौन उत्पीड़न है l
शारीरिक रिश्ता/यौन सम्बन्ध बनाने की मांग करना या उसकी उम्मीद करना जैसे यदि विभाग का प्रमुख, किसी जूनियर को प्रमोशन का प्रलोभन दे कर शारीरिक रिश्ता बनाने को कहता है,तो यह यौन उत्पीड़न है l
यौन स्वभाव की (अश्लील) बातें करना जैसे यदि एक वरिष्ठ संपादक एक युवा प्रशिक्षु /जूनियर पत्रकार को यह कहता है कि वह एक सफल पत्रकार बन सकती है क्योंकि वह शारीरिक रूप से आकर्षक है, तो यह यौन उत्पीड़न हैl
अश्लील तसवीरें, फिल्में या अन्य सामग्री दिखाना जैसे यदि आपका सहकर्मी आपकी इच्छा के खिलाफ आपको अश्लील वीडियो भेजता है, तो यह यौन उत्पीड़न है l
कोई अन्यकर्मी यौन प्रकृति के हों, जो बातचीत द्वारा , लिख कर या छू कर किये गए हों।

शिकायत कौन कर सकता है?
जिस महिला के साथ कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न हुआ है, वह शिकायत कर सकती हैl अगर महिला शारीरिक तौर से स्वस्थ नही तो उनके परिजन भी शिकायत दर्ज करा सकते है।
शिकायत किसको की जानी चाहिए ?
अगर आपके संगठन/ संस्थान में आंतरिक शिकायत समिति हैतो उसमें ही शिकायत करनी चाहिए। ऐसे सभी संगठन या संस्थान जिनमें 10 से अधिक कर्मचारी हैं,आंतरिक शिकायत समिति गठित करने के लिए बाध्य हैंl
अगर संगठन ने आंतरिक शिकायत समिति नहीं गठित की है तो पीड़ित को स्थानीय शिकायत समिति में शिकायत दर्ज करानी होगीl दुर्भाग्य से कई राज्य सरकारों ने इन समितियों को पूरी तरह से स्थापित नहीं किया है और किससे संपर्क किया जाए,यह जानकारी ज्यादातर मामलों में सार्वजनिक नहीं हुई है।

शिकायत कब तक की जानी चाहिए? क्या शिकायत करने की कोई समय सीमा निर्धारित है ?
शिकायत करते समय घटना को घटे तीन महीने से ज्यादा समय नहीं बीता हो, और यदि एक से अधिक घटनाएं हुई है तो आखरी घटना की तारीख से तीन महीने तक का समय पीड़ित के पास है l

शिकायत दर्ज करने के बाद क्या होता है?

यदि वह महिला चाहती है तो मामले को ‘कंसिलिएशन’/समाधान’ की प्रक्रिया से भी सुलझाया जा सकता है। इस प्रक्रिया में दोनों पक्ष समझौते पर आने की कोशिश करते हैं, परन्तु ऐसे किसी भी समझौते में पैसे के भुगतान द्वारा समझौता नहीं किया जा सकता है l यदि महिला समाधान नहीं चाहती है तो जांच की प्रक्रिया शुरू होगी, जिसे आंतरिक शिकायत समिति को 90 दिन में पूरा करना होगा l यह जांच संस्था/ कंपनी द्वारा तय की गई प्रकिया पर की जा सकती है, यदि संस्था/कंपनी की कोई तय प्रकिया नहीं है तो सामान्य कानून लागू होगा l समिति पीड़ित, आरोपी और गवाहों से पूछ ताछ कर सकती है और मुद्दे से जुड़े दस्तावेज़ भी माँग सकती है lसमिति के सामने वकीलों को पेश होने की अनुमति नहीं है l

जाँच के ख़त्म होने पर यदि समिति आरोपी को यौन उत्पीडन का दोषी पाती है तो समिति नियोक्ता (अथवा कम्पनी या संस्था, आरोपी जिसका कर्मचारी है) को आरोपी के ख़िलाफ़ कार्यवाही करने के लिए सुझाव देगी। नियोक्ता अपने नियमों के अनुसार कार्यवाही कर सकते हैं, नियमों के अभाव में नीचे दिए गए कदम उठाए जा सकते हैं :
लिखित माफी
चेतावनी
पदोन्नति/प्रमोशन या वेतन वृद्धि रोकना
परामर्श या सामुदायिक सेवा की व्यवस्था करना
नौकरी से निकाल देना

⭐पॉश कानून के तहत, 10 या अधिक कर्मचारियों वाले हर एक कार्यालय में प्रत्येक नियोक्ता के लिए आंतरिक समिति (आईसी) का गठन करना आवश्यक है. 10 से कम कर्मचारी होने की स्थिति में जिन प्रतिष्ठानों में आईसी का गठन नहीं किया गया है, या यदि शिकायत नियोक्ता के खिलाफ है, या अनौपचारिक क्षेत्र में कार्यरत महिलाओं के लिए, राज्य सरकार के जिला अधिकारी या कलेक्टर को प्रत्येक जिला में, और यदि आवश्यक हो तो प्रखंड स्तर पर, स्थानीय समिति (एलसी) का गठन करना है. प्रशिक्षण और शैक्षिक सामग्री विकसित करने, जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने, कानून के कार्यान्वयन की निगरानी करने और कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के मामलों में दायर और निपटाए गए मामलों की संख्या के आंकड़े रखने की जिम्मेवारी भी सरकार की है।

नियोक्ता के कर्तव्य
१)नियोक्ता को अपने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के मामलों से निपटने के लिए अपनीसंस्था /कम्पनीमें ‘आंतरिक शिकायत समिति’कागठनकरनाचाहिए। ऐसी समिति की अध्यक्षता संस्था या कम्पनी की किसी वरिष्ठ महिला कर्मचारी द्वारा की जानी चाहिए। इसके अलावा इस समिति से सम्बन्धित जानकारी कार्यस्थल पर किसी ऐसी जगह लगाई जानी चाहिए जहाँ कर्मचारी उसे आसानी से देख सकें।

२(नियोक्ताओं को मुख्य रूप से सुनिश्चित करना है कि कार्यस्थल सभी महिलाओं के लिए सुरक्षित है। महिला कर्मचारियों को कार्यस्थल पर आने-जाने वालों (जो कर्मचारी नहीं हैं) की उपस्थिति में असुरक्षित महसूस नहीं करना चाहिए। इसके अलावा,नियोक्ता को अपनी ‘यौन उत्पीड़न सम्बन्धी नीति’ और जिस आदेश के तहत आंतरिक शिकायत समिति की स्थापना हुई है, ऐसे आदेश की प्रति, ऐसे स्थान पर लगाकर देनी चाहिए जिससे सभी कर्मचारियों को इसके बारे में पता चल सकेl

३)नियोक्ता को यौन उत्पीड़न के मुद्दों के बारे में कर्मचारियों को शिक्षित करने के लिए नियमित कार्यशालाओं का आयोजन करना चाहिए l उन्हेंअपने सेवा नियमों में यौन उत्पीड़न को भी शामिल करना चाहिए और कार्यस्थल में इससे निपटने के लिए एक व्यापक नीति तैयार करनी चाहिए।

आशा करती हूं कि यह लेख आप सभी को पसंद आया होगा इसलिए को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें और कमेंट द्वारे बताएं कि आपको यह लेख कैसा लगा।

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